बिलासपुर छ. ग.
विषय _विश्व शांति
शीर्षक - मन की इच्छा
मन की इच्छा है की तिरंगा को आसमान से भी ऊँचा फहरा दूँ |
आज कहता है | मन की उन वीरों को याद कर,
उनकी कुर्बानी पर ये सर बार बार झुका दूँ |
जिनके कारण हम चैन से सोते है | उन वीरों को नमन करुँ |
फिर आकाश के अंतिम छोर तक ये झंडा लहरा दूँ |
हजारों बलिदानियों को सर झुका कर नमन करुँ |
उन देश के वीरों को नम आँखों से याद करुँ |
फिर झंडा लहरा दूँ |की वो ये देख तृप्त हो जाये |
आज भारत फिर सोने की चिड़िया बन जाये |
पुरे भारत वासी के चेहरे पर फिर सच्ची मुस्कान आ जाये|
मन की इच्छा है |की तिरंगा जो आसमान से भी ऊँचा फहरा दूँ |
जिस तिरंगे से हमारी आना, बान, शान है |
वह तिरंगा कभी झुके ना इस बात का ख्याल रख ले |
मन की इच्छा है | की तिरंगा को आसमान से भी ऊँचा फहरा दूँ |
भारत के वासी हम मिलजुलकर रह ऐसा कुछ कर जाये |
विश्व शांति हेतु हम एक उदाहरण बन जाये |
मन की इच्छा है |की तिरंगा को आसमान से भी ऊँचा फहरा दूँ |
फिर आकाश के अंतिम छोर तक ये झंडा लहरा दूँ |
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
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