Saturday, June 6, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- किसान

रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
    जिला :- कांकेर
   विषय :- यमक अलंकार के 
             प्रयोग साथ किसान 
 

   ~ °•°● *किसान*●°•° ~
किसान 
देश का अन्नदाता,
जग की पेट की 
आग बुझाने फसल उगाता।

धरा को माता जान नित 
चरणों में शीश झुकाता,
ऊंचे घोर मन्दर का स्वप्न न 
देख घोर मन्दर में जीवन बिताता।

कई बेर लोगों का पेट भरता,
स्वंय तीन बेर खाता।
आलस,निद्रा त्याग 
भोर होते खेत है जाता,
हर विपदा को भूल 
फसलों को देख मुस्कुराता।

ना धूप ना ठंड ना 
पावस से भय खाता,
मेहनत करता,जिम्मेदारियों 
का दम भर भूखे सो जाता।

मूसलाधार बरसता बादल 
काली घटा का 
घमंड घटा जाता।
घने बादलों को देख केकी रव 
के समान किलक कर जगती 
की मूक प्यास बन जाता।

प्रस्तुत कविता में यमक 
अलंकार का प्रयोग :-
*घोर मन्दर*
1.घोर मन्दर-अर्थात ऊँचा भवन
2.घोर मन्दर-अर्थात गुफा
*बेर*
1.तीन बेर अर्थात तीन  बार
2.तीन बेर-अर्थात तीन बेर के फल
*घटा*
1.घटा -अर्थात बादल
2.घटा-अर्थात कम करना
*जगती*
1.जगती-अर्थात संसार
2.जगती-अर्थात जागना

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ. ग.)

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