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*रचनाकार:-एच एस अरमो "अरमान"
*निवास:-रायपुर (छत्तीसगढ़)
*जिला:- रायपुर ।
*शीर्षक-"अंहकार का फल "
*विधा:--कविता (छ्न्द मुक्त )
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"""अंहकार का फल """
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अंहकार हम मानव को,
कभी,इन्सान से शैतान बना देता ।
इक था,अंहकारी रावण,जिसने,
किया था,सीता का हरण,
किया था,अनैतिकता का वरण,
और राम के हाथों हुआ,उसका वरण ।
इक था,अंहकारी राजा हिरण्यकशिपु,
प्रभु प्रार्थना का था,घोर विरोधी,
कहता,मेरे जैसा,इस सँसार में,
शक्तिशाली,महाबली ना कोई दूजा ।
इक था,अंहकारी राक्षस भस्मासुर,
पाया था,ऐसा अनूठा वरदान,
देवों के देव ,महादेव से---
वो रखें,हाथ किसी के सिर पर,
हो जाता,वो तत्काल भस्म,
यही अंहकारी-वरदान ने किया उसे भस्म ।
चीन को है,अंहकार है शक्तिशाली देश होने का,
अपने पड़ोसी,देशों को,डराता -धमकाता ,
अपनी सैन्य-सामरिक शक्ति का,
सीमाओं पर,खुला प्रदर्शन करता ,
आज वो परेशाँ है,कोरोना वायरस और आन्तरिक सुरक्षा व विद्रोह से ।
हे!मानव,अंहकार,मानवीयता का विनाशक है,
जिसने भी,इसको भूल से अपनाया है,
वो खुश बहुत हुआ,पर उसे इसी अंहकार ने,
इक दिन,दुनियाँ से,उसे मिटाया है ।
हे!मानव तुम,पालो ना कभी अंहकार,
ये मीठे बेर की जगह,कडुआ करेला है
साँप को दूध पिलाते,पर उगलता वो जहर है,
सदा इंसानियत को पालो,सन्त-महात्मओं का यही कहना है ।।
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व्याख्या:-"अंहकार का फल "कविता
में मानव को अंहकारी होने से उसके जीवन में कितना प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।इसके लिए कई सन्दर्भ आपके समक्ष रखा गया है ताकि इसके महत्व को भलीभांति समझा जा सके ।
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प्रस्तुति-एच-एस-अरमो
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