Tuesday, June 16, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से दूजराम साहू की रचना- दीवारों के कान

रचनाकार -दूजराम साहू
जिला- राजनांदगाँव
विधा -कविता 
शीर्षक- दीवार के घला कान होथे! 

समझ नई आए मनखे
कईसे अब भयरा  होगे हे ! 
सियान मन कहीथे कि
दीवार के घला  कान होथे !! 

लखटा म बईठे आदमी 
घेरी भेरी चिल्लात हे, 
फेर का कहिबे नई सुनत हे , 
तभो ले काकर संग गिजगीजात हे !
समझ नई आए कईसे अनजान होगे !! 

फोन के तार घुसारे हे कान म
कहीं गोठियाले नई धरे धियान म , 
अकेल्ला बईठे बईठे पगला हो जथे 
चिल्ला चिल्ला के मनखे खुद बईहा गेहे! 
तीर म आदमी दुरहीयाके बिरान होगे !! 


दूजराम साहू

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