रचनाकार- गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न"
पता- रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विधा- "हाइकु"
शीर्षक- "जीवन"
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जन्म-मरण
का खेल है जीवन
पाया या खोया ।
वक्त ने धोया
तेरी ही जीव,माया
रक्त से रोया ।।
कर्म फल तो
भोगने होंगे तुम्हें
बता क्या बोया?
अभिशाप है
दीर्घ निद्रा सेज में
बहुत सोया ।।
मिलेगा बस
कर्तव्य पथ पर
भाल भिगोया ।
कुछ न होगा
तू रख धैर्य यहॉं
होना ही होया ।।
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गुलशन खम्हारी"प्रद्युम्न"
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