Thursday, June 25, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से नलिनी बाजपेयी कृत आलेख- सैनिकों और परिवार

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी 
संबलपुर, कांकेर, (छ .ग.)
शीर्षक-सैनिक एवं उनके परिवार पर लेख

*सैनिक एवं उनका परिवार*

सैनिकों की शहादत 
     की कीमत कौन चूका सकता है,

शहादत का कर्ज 
       तो देश पर उधार रहता है।

हम चैन की 
      नींद इसलिए
 सोते है कि,

हमारे जांबाज 
       सैनिक शहादत के लिए हर पल तैयार 
         रहते है।



"भारतीय सैनिक और उनका परिवार एक परिदृश्य" सुनकर ही मन में सम्मान मिश्रित श्रद्धा भाव आ जाता है। सर्वप्रथम मैं उनको नमन करती हूँ।अपने जीवन को कुर्बान करने वाले प्रतिपल बर्फ की वादियों में मौत के साए में बैठे रहने वाले, अपने घर परिवार से दूर निर्जन भूमि, या। कह लीजिए विपरीत परिस्थिति वाली जगहों  में कर्तव्य निर्वाह करने वाले रणबांकुरे को, जांबाज़ सैनिकों के शहादत पर हम चंद शब्द, चंद पुष्प, चंद वाक्य, पुष्पहार ,दीप के साथ कुछ दिनों ही उन पर बातें करते हैं ।मगर बाद में उन्हें विस्मृत कर दिया जाता है ।यह बड़े दुर्भाग्य की बात है और आश्चर्य की भी  बात है जिनके चलते रहते हम चैन की नींद सोते हैं,हम सुरक्षित रहते है। उनकी शहादत के बाद उनका राजनीतिज्ञों के द्वारा तुष्टिकरण का कार्य प्रारंभ होता है ।सम्मान भावना की जगह सिर्फ रस्म अदायगी का कार्य होता है। लोग उस शहादत को आजीविका की दृष्टि से भी देखते हैं। मगर उनकी शहादत के बाद उनके परिवार के लोगों के प्रति उनकी भावना भी देखने मिलती है और जो उनके बच्चे  तिरंगे पर बलिदान होने की कसम खाते हैं, उनकी शहादत की भावना को प्रबल बना देती है ।कुछ लोग शहादत को भी शक की नजर से देखते हैं विपक्षी पार्टी उसमें भी मीन -मेख  निकालते रहते हैं यह अच्छी बात नहीं है। अभी गलवान घाटी एवं पूर्व में पाकिस्तान में हुए सर्जिकल स्ट्राइक को भी शक की नजरों से लोग देखते हैं ।ऐसी बातें सैनिकों के मनोबल को गिरा देती है ।
       जीवन है तो मरना भी है मगर मातृभूमि के लिए मरने वालों की मौत शानदार मौत होती है ।सरहद में तन्मयता के साथ हड्डियों को गला देने वाली ठंड में भी वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। 

    वैसे देखा जाएं तो सरकार की तरफ से बहुत कुछ परिवार के लिए किया जाता है। आर्थिक दृष्टि से तो सक्षम बना ही देते हैं। मगर कहीं बार विपरीत परिस्थिति भी देखने को मिलती है ।कभी -कभी सुनते है सैनिक का परिवार दर-दर भटक रहा है।ये सब सुनकर ठीक नहीं लगता है। मानसिक रूप से या भावनाओं की दृष्टि से देखें तो जरूर परिवार उस सुख से  वंचित हो जाता है। मगर समय समय में शहादत को याद करके उनके परिवार को सम्मानित  किया जाता है ,और करना भी चाहिए ।मैं वीरों की शहादत एवं उनके परिवार के ऊपर अगाध श्रद्धा रखते हुए उनको नमन करती हूँ।

    नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ. ग,)

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