पता -पेंडरवानी, बालोद ,छ.ग.
विधा - वर्ण पिरामिड
शीर्षक - मेहनत ही ख़ुदा
(१)
तू
किस
बात का ?
अभिमान
करता है रे ,
मरना तुझे भी
है औरों की तरह ।
(२)
तू
काहे?
इतना
इतराता
चंद तमगे
कमा लेने पर,
जब फ़ना जिस्म है।
(३)
क्यूं?
तुम
जलते
अपनों की
तक़दीर पे
तेरे भी हाथ है
जहां बदलने को ,
(४)
तू
रब
तो नही !
मैंने सुना ,
एतबार से
ज्यादा अमल पे
यकीन है तुम्हारा ।
- - शैलेन्द्र चेलक - -
आई लाइक सर जी बहुत सुंदर रचना
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