Monday, June 1, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से अजय पटनायक की रचना

रचनाकार:- अजय पटनायक
जिला:- रायगढ़,छत्तीसगढ़
शिर्षक:- ये भारत वीरों की धरती
विधा:-मुक्तक
रस:- वीर

*आहत धरा चित्कार रही है,*
 *भारत मां भी पुकार रही है।*
 *उठो जागो ए देश के वीरों,*
*दुश्मन सीमा से निहार रही है।।*
*सुर्ख लाली से रंगा तिरंगा,*
*मानवता से हार रही है।*
 *शिव के नेत्र बंद पड़े हैं, कली कल्कि संहार रही है।।*
*ये बीर सपूतों दिखादो, हमारे रग में कितनी रवानी है.....* 
*ये भारत वीरों की धरती, इसकी अमिट कहानी है....*
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**प्रादुर्भाव हुए हिंद में,*
*कई योद्धा महान बने।*
 *गज शक्ति बाली की भुजाएं,*
 *भानु निगल वीर हनुमान बने ।।*
*पापी कंस को पटक के मारा,*
 *कान्हा मथुरा के प्राण बने।*
*दशानन के नाभि छेदकर*,
 *श्री राम भगवान बने।।*
*गांडीव के बल पर अर्जुन,*
 *महाभारत के अभिमान बने।*
 *क्षत्रियों के दंभ नष्ट कर ,*
 *विश्व वीर परशुराम बने।।*
 *भीष्म की प्रतिज्ञा भारी, हरिशचंद जैसे सत्यव्रत दानी है......*
 *ये भारत वीरों की धरती, इसकी अमिट कहानी है......*
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*इतिहास के पन्नों पर चमके*,
*कई शौर्ये की त्रास है। देखकर वो विभत्स वेदना * *आज भी चीखती हर लाश है।।*
*छत्रपति शिवा की दहशत,*
 *जब मुगलों पर छा जाती थी।*
 *महाराणा के चिंघाड़ सुनकर,*
 *भय भी भयभीत हो जाती थी।।*
*चाणक्य के चोटी से जन्मे, वीर चंद्रगुप्त की बात करें।*
 *सिकंदर का सर झुका दे*
*ऐसे पोरस को याद करें।।*
 *धर कृपाण हरिसिंह सा, रणजीत सा मान बढ़ाएंगे। शब्दभेदी बन बाण चौहान का,*
*देश की आन बचाएंगे।।*
*बन सम्राट अशोक सा,*
*पद्मिनी सा जौहर दिखानी है.....*
*ये भारत बीरो की धरती,*
*इसकी अमिट कहानी है......*
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*आजादी की लगी चिंगारी,*
 *ज्वाला, निकलने लगे जंजीरों से।*
 *बांध कफन हर माथे पर,*
 *बिछ गई धरती वीरों से।।*
 *क्रांति की बिगुल बज गई,*
 *मंगल के ललकारो से।*
 *झांसी वाली रानी लड़ गई,*
 *जंग लगी तलवारों से* ।।
*फांसी चुना भगत बिस्मिल ने ,*
*इंकलाब के नारों से।* *चंद्रशेखर ने आजादी पाई,*
 *गोलियों की बौछारों से।।*
 *सात समंदर पार सुभाष ने,*
*जंग छेड़ दी, ब्रिटिश सरकारों से।*
*खुदीराम ने बचपन त्याग दी,*
 *देश प्रेम के संस्कारों से।।*
 *बांध लंगोट चरखे से जिसने,*
 *अंग्रेजों को पीला दी पानी है......* 
*ये भारत वीरों की धरती, इसकी अमिट कहानी है....*
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*आज भी बीर कम नही है।*
*हमसे लड़ ले, किसी मे दम नहीं है।*
*मेरे देश को बन्दन है,*
*जहां बीर अभिनंदन है।*
*जशवंत सिंह को सलाम हमारा,*
*बिक्रम बत्रा चन्दन है।।*
*ये धरती है नमन तुम्हे,*
*कुर्बान तुझपर जवानी है,.....*
*ये भारत बीरो की धरती,*
*इसकी अमिट कहानी है.......*
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*अब हर पथ अग्निपथ होगा।*
 *दुश्मन लाली से लथपथ होगा।।*
*कारगिल जैसी हर जीत होगी,*
 *कलिंग सा बहता रक्त होगा।* 
*विश्व विजय कर लहरायेंगे तरंगा,*
 *हर युद्ध हल्दीघाटी और पानीपत होगा।।*
*दुश्मन भी सर गिनते रह जाएंगे,*
*देनी ऐसी कुर्बानी है....*
 *ये भारत वीरों की धरती, इसकी अमिट कहानी है........*

       *मौलिक रचना*
    *अजय पटनायक*

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