जिला-कोरबा छत्तीसगढ़
विधा-कविता पुनरूक्ति प्रकाश अलंकार पर गरीबी के परिदृश्य में
शीर्षक- गरीबो की मोती
प्रस्तुत है कविता--
गरीब गरीब नहीं होते हैं,
उनके हिय मे होते है ;
स्वाभिमान के अनमोल मोती ।
दानें दानें को तरस जाते हैं, पर अपना ईमान नहीं खोते हैं ।
वे ही हैं पृथ्वी के मालिक; उन्ही के दम से भरते हैं, दौलतमंदो के खजानें ।
फिर भी वो ही तरसते हैं , रोटी रोटी भूख मिटाने को ।
कैसे मिटेगी ये उंच -नीच की खाई,
पल पल मैं सोंचा करती हूँ ।
हे ईश्वर! शक्ति उन्हें देना,
स्वाभिमान से नहीं डिगाना ।
।।इति ।।
गोमती सिंह
कोरबा छत्तीसगढ़
ब्याख्या- रचनाकार गरीबों की स्थिति दर्शाने का प्रयास की है । किस तरह गरीब भूखे पेट रह कर भी अपना स्वाभिमान नहीं खोते हैं
गोमती सिंह
बहुत सुंदर रचना,गरीबो की मोती शिर्षक पर लिखी यह कविता वास्तव में प्रत्येक इंसान के स्वाभिमान को ही दर्शाता है स्वाभिमान इंसान को अमीरी गरीबी के मानदंडों पर नहीं परखा जा सकता है
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