जिला----जांजगीर -चाम्पा(छत्तीसगढ़)
विधा---कविता
शीर्षक--- इधर उधर की बातें
व्याख्या--कवि के द्वारा सामान्य समस्याओं का वर्णन किया गया है ।
इधर उधर की बातें
ये मेरा पड़ोसी मुरलीधर ।
कभी मुरली नहीं बजाता ।
मुरली बजाओ कह उसे चिढ़ाते ।
सुनकर चिढ़ता न गुस्साता ।
गुलाब जी आपको मालूम है ।
गुलाब का फूल किसने तोड़ा है ।
तुमको सुनकर हंसी आ रही है ।
हमें कहीं का नहीं छोड़ा ।
रुपचंद तेरी सुंदरता पर ।
सौ सौ रुप कुर्बान ।
तेरी सुंदरता देख छूटे ।
कामदेव का प्रान ।
चमेली चमेली का तेल लाओ ।
मैं नवरत्न मंगाया नहीं हूं ।
प्रेम से ही कह रहा हूं ।
क्रोधित नहीं हूं ।
नागनाथ को मालूम होगा ।
नाग किधर निकला ।
पहले भी निकला था ।
और आज फिर निकला ।
गिरधारी लाल चौहान
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