संबलपुर, जिला-कांकेर (छ .ग.)
विषय - गजल सृजन
क़ाफिया :- अता
रदीफ :- हूँ मैं
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चीन की दगाबाजी को नहीं भूलता हूँ मैं,
माँ भारती कसम तेरे जर्रे-जर्रे पर मरता हूँ मैं।
बीस जवानों की शहादत अब व्यर्थ ना जाने देंगे,
भू के इक इंच के लिए गिरकर संभलता हूँ मैं।
निहत्थों पर पत्थर बरसा कर दी है गद्दारी,
धरा रक्षा के लिए डंडों का वार सहता हूँ मैं।
शांति समझौता करने गए थे मेरे भू- वीर,
ऐसे बेकार समझौता को लानत भेजता हूँ मैं।
तू मक्कार तेरा हर उत्पाद है बेकार "नलिन"
आज चीनी उत्पाद का बहिष्कार करता हूँ मैं।
व्याख्या-प्रस्तुत कविता में अभी तत्काल में हुई गलवान घाटी में चीन के विश्वासघात के बारे में बताया गया है।हमारे बीस सैनिक शहीद हुए है इसी बात को लेकर चीनी समानों की बहिष्कार की बात कही गई है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ.ग.)
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