जिला- रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक- अपन मुलुक के मया
अपन मुलुक के मया
मंहु अपन मुलुक के खातिर अपन परान गंवातेंव जी,
भारत भुईया के दुलरवा बेटा कहातेंव जी।
मंहु अपन मुलुक.................
हमर देश मा राज करईया
हमर मरजाद अऊ धन लुटैया
बैरी दुश्मन ला अपन समझ के
सुमत के गोट गोठियातेव जी
मंहु अपन मुलुक..................
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख,ईसाई
एके महतारी के लईका अन
झन करव एक दूसर ले बैर
अही बात समझातेंव जी।
मंहु अपन मुलुक....................
गांधी -सुभाष के रददा म चलके
सुमता के गोठ गोठियातेंव जी।
अमर रखे बर आजादी ल,
जिनगी ल दांव लगातेंव जी
मंहु अपन मुलुक......................
आतंकवाद, नक्सलवाद मिटाये खातिर
बीर शहीद बन जातेंव जी।
भारत मां के कर्ज चुका के,
जीवन धन्य बनातेंव जी।
मंहु अपन मुलुक....................
गिरे,परे,हपटे मन संग
मंहु बदतेंव मितान जी
दुख-सुख के पीरा ल बांट के
अपन जिनगी ल सफल बनातेंव जी।
मंहु अपन मुलुक....................
डिग्री लाल जगत निर्भीक
खरसिया जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़
उम्दा... 👌👌💐💐🙏🙏
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteबहुत बेहतरीन महोदय जी👌👌👌👌💐💐
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना
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