जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक--- जय जगन्नाथ
व्याख्या--कवि के द्वारा जगन्नाथ भगवान की महिमा का एवं उनकी कृपालुता का वर्णन किया गया है।
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जय जगन्नाथ
जय जगन्नाथ,जय जगन्नाथ ।
कृपा आपकी सबके साथ ।
जो शरण में आया आपका ।
सबको किये सनाथ ।
नाम आपका जगत नाथ ,
आप जगत के स्वामी ।
कभी राम रुप कभी कृष्ण रुप,
सभी रुपों में नामी ।
लीला करते रुप धरते,
आप भक्तों के साथ ।
आप विराजे धाम पुरी ।
सबकी करते इच्छा पूरी ।
कोई सुत मांगें कोई मांगे शिक्षा ।
लौटे न कोई रहकर अधूरी ।
ब्रम्हा विष्णु शिव आते शरण में।
सभी नवाते माथ ।
दया के सागर हे भगवन ।
करुं तुम्हें मैं शत शत नमन ।
चाहूं शरण मैं प्रभु आपके ।
करदो धन्य ए तुच्छ जीवन ।
ले लो मुझको अपने चरण में
मनकी मिटा दो प्यास ।
जय जगन्नाथ,जय जगन्नाथ ।
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