खैरागढ़ छत्तीसगढ़
विधा- कविता
"शराब और शराबी"
शराब कितना अद्भुत है,एक जाम के लिए शराबी को सिखाता है
लड़ना।
पर ,देश के लिए नहीं, निकम्मा बना सिखाता है बीवी बच्चों से
लड़ना।
जब मिले जेब खाली, बोतल के लिए बेच देते है पत्नी का
गहना।
नई बात नहीं पर अचरज होता है, जब सौदा करते हैंअपनी बेटीऔर
बहना।
बेशर्मी की हद हो जाती है, नशे में धुत चला देते हैं मां पर कुल्हाड़ी
अपना।
मदमस्त बेहोश शराबी सड़क पर पड़े, इनके मुख पर बरसाते स्वान
चरणामृत अपना।
शराब सरकारी खजाने कीआवक, शराबी इस पर लुटाते हैं सब कुछ
अपना।
शराब बड़ी अजब चीज है, लोग गंगाजल छोड़ इसे पी गवा देते हैं
प्राण अपना।
शराब की नशा छोड़, प्रभुभक्ति की नशा कर बचा लो परिवार
अपना।
व्याख्या-
प्रस्तुत कविता में मैंने शराब और शराबी के बारे में लिखा है जिसमें शराबी, शराब को ही सबकुछ मान कर उसके नशे में धुत होकर जानवरों जैसे सड़कों पर पड़े रहते हैं और कुत्ते उनके मुंह पर अपना पेशाब तक कर देते हैं। कितनी घृणा की बात है और इस के चक्कर में लोग अपने पत्नी, भाई ,बच्चे परिवार सब को नुकसान पहुंचाते हैं और अंत में खुद मृत्यु को वरण कर लेते हैं।
पदमा साहू
खैरागढ़ छत्तीसगढ़।
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