स्थान___नवापाराखुर्द/सकती
जिला_जांजगीर_चांपा, छत्तीसगढ़
विधा---कविता
शीर्षक---पेड़ो का कवि सम्मेलन
व्याख्या____प्रस्तुत कविता में कवि गीत के माध्यम से पेड़ों का विकास ,महत्व,मानव जीवन के विकास में योगदान पेड़ों की उपयोगिता को भूलकर मानव के द्वारा उनकी अंधाधुंध कटाई का वर्णन किया गया है ।
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पेड़ों का कवि सम्मेलन
मधुर मधुर गीत, पेड़ गाने लगे हैं ।
बैठ एक दूसरे को, सुनाने लगे हैं ।
पहली मंच पर, जामुन को बुलाया गया ।
यह पहला सम्मेलन पेड़ों का बताया गया ।
मां सरस्वती के चरणों में उसने नमन किया ।
पेड़ों के विकास पर, कविता सुनाया गया ।
सुनकर सभी तालियां,बजाने लगे हैं ।
उसके बाद अमरुद ने ,मंच सम्हाला ।
सबके सामने रख दिया,भाषण का प्याला ।
हमारी जाति का,आज विनाश हो रहा ।
दूर दूर ही नहीं, आसपास भी हो रहा ।
सब मानव की है देन, उंगली उठाने लगे हैं ।
मंच का संचालन आम, शानदार कर रहा था ।
किसी के बारे में कुछ, बोलने से डर रहा था ।
जो बोला है सामने, अच्छा लग रहा था ।
मानव हमारी विनाश से, अपना चाहता विकास ।
ऐसा हुआ है क्या, क्या है इसका इतिहास ।
स्वप्न मिटा के स्वप्न , खूब सजाने लगे हैं ।
अंगूर को जब मौका मिला हास्य पर उतर गया।
खूब हंसाया सबको, और बहुत कुछ कह गया ।
मानव हवा हमसे है पाते,हम ही पानी लाते हैं ।
हम से अलग कुछ भी नहीं,हर कहानी लाते हैं ।
जड़ तना पत्ते फूल फल, सब भुलाने लगे हैं ।
उपसंहार वरगद ने किया,अपना उदाहरण खुद दिया ।
तुम सबके सामने है यह, जिसने अधिक जीवन जीया ।
मानव तुम भी सुधर जाओ,मेरी तरह जीवन अपनाओ ।
हमारे विनाश से तुम्हारा कल्याण कभी होगा ही नहीं ।
खत्म हुआ सम्मेलन,सब अपने स्थान पर जाने लगे हैं ।
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