Friday, May 29, 2020

छत्तीसगढ़ के मुंगेली से नागेश कश्यप की रचना- गांव के गोठ

रचनाकार का नाम:- नागेश कश्यप
जिले का नाम:- मुंगेली(छत्तीसगढ़) 
शीर्षक:- गाँव के गोठ
विधा:- सरसी छंद" (मानवीकरण अलंकार)

 सरसी छंद" (मानवीकरण अलंकार)
                  गाँव के गोठ

हाँसत गाथे तरिया नदिया, पुरवाइ तान धरय।
आके झाँकव गाँव हमर गा, माटी परान हरय।।

धरती  दाई   के   कोरा  मा, अन  धन  के  भंडार।
नव दुलहिन कस धान ह लागे, जेखर मया अपार।।

होत बिहनिया  कुहू कुहू गा, कोयली सुर लगाय।
फूल घलो  हा  चँवरा बइठे, हाँसे अउ  मुसकाय।।

कोरे   गाँथे   बेटी   जइसन, अँगना  सुघर  लिपाय।
नाचत झूमत पेड़ घलो मन, करतब गजब दिखाय।।

पहुना बनके अँगना आथे, सुरुज किरन हा रोज।
डारा पाना सुख  के बासा, अंतस मन  ले खोज।।

गाँव म  चिरई  चुरगुन  संगी, सबके  मीत  मितान।
पाथर   पाथर  देव   बरोबर, ठाकुर  देव  सियान।।

                                         नागेश कश्यप।।

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