जिला- रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
*विषय... पर्यावरण संरक्षण*
(विधा ......कविता)
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विशाल वसुंधरा के सानिध्य में,
प्रकृति प्रदत्त संसाधन विधान ।
जिसका सम्बन्ध जीवन से है,
विशुद्ध पर्यावरण की पहचान।
प्रकृति पर विजय करना ही,
आजीवन मानव का अभियान।
सभी कल्पना कर गया साकार,
विलक्षण बुद्धि का मनु सन्तान।
सुख-सुविधा का नव कलेवर
जग विख्यात विज्ञान वरदान।
चतुर्दिक सम्पदा निर्मम दोहन ,
विज्ञान भी अभिशाप में निदान।
कलयुग में उद्योग जगत से
सत्कृत सौंदर्य हुआ कलुषित।
ध्वनि अवनि जल अनल मलिन
जनाधिक से पर्यावरण दूषित।
लाखों विद्यार्थी प्रतिवर्ष निबन्ध
पर्यावरण रक्षण पर लिखते हैं।
पर देखो जग की यह विडंबना,
एक भी अमल में नहीं दिखते हैं।
भावी जीवन का अंत दुखदाई
विपदा के पहले करो उपचार।
संरक्षण करो पर्यावरण का
आज समय की यही पुकार।
कथनी करनी बिलकुल एक हो,
तभी होगा पर्यावरण संरक्षण।
आओ मिलकर सब हाथ बढ़ाएँ,
निर्वन भूमि में करें पौध रोपण।
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