Thursday, May 14, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से प्रवीण कुमार ठाकुर के दोहे

रचनाकार -- प्रवीण कुमार ठाकुर 
जिला -- राजनांदगाँव ( छ .ग. )
शीर्षक -- प्रवीण के दोहे 
विधा -- छंद ( दोहा )

रचना --

।।1।।
नाद मधुर खग गुंजती ,
          सरस पवन चहुँ ओर ।
रक्त रंग नभ घोलती ,
          अरुण उदित हो भोर ।।
          ******************
।।2।।
नीड़ तजे खग दूर हो,
          मन रख भोजन आस ।
जंग जीत कर अन्न की ,
          देत काल को मात ।।
          ****************
।।3।।
अस्त सूर ज्यौं सांझ हो ,
          शांत सकल जग होय ।
दीप जले तम दूर हो ,
          जगमग रजनी होय ।।
          *****************
।।4।।
करम धरम मन जानिए ,
          रख मन बस में आप ।
बस ज्यौं तू मन होय रे ,
          सिन्धु बीच जस नाव ।।
          *******************
।।5।।
अति गति मति क्षति करे है ,
              हद का नित हो भान ।
पर हित पर उपकार हो ,
              रखे सभी का मान ।।
              *****************
।।6।।
विश्व सकल रण भूमि है ,
          सैनिक जनता आम ।
लघु रुप अरि अति धरे है ,
          छुप चुप लड़ निज धाम ।।
          *********************

 रचना 
*********
प्रवीण कुमार ठाकुर 

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...