जिला -- राजनांदगाँव ( छ .ग. )
शीर्षक -- प्रवीण के दोहे
विधा -- छंद ( दोहा )
रचना --
।।1।।
नाद मधुर खग गुंजती ,
सरस पवन चहुँ ओर ।
रक्त रंग नभ घोलती ,
अरुण उदित हो भोर ।।
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।।2।।
नीड़ तजे खग दूर हो,
मन रख भोजन आस ।
जंग जीत कर अन्न की ,
देत काल को मात ।।
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।।3।।
अस्त सूर ज्यौं सांझ हो ,
शांत सकल जग होय ।
दीप जले तम दूर हो ,
जगमग रजनी होय ।।
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।।4।।
करम धरम मन जानिए ,
रख मन बस में आप ।
बस ज्यौं तू मन होय रे ,
सिन्धु बीच जस नाव ।।
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।।5।।
अति गति मति क्षति करे है ,
हद का नित हो भान ।
पर हित पर उपकार हो ,
रखे सभी का मान ।।
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।।6।।
विश्व सकल रण भूमि है ,
सैनिक जनता आम ।
लघु रुप अरि अति धरे है ,
छुप चुप लड़ निज धाम ।।
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रचना
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प्रवीण कुमार ठाकुर
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