जिला -रायगढ़, छत्तीसगढ़
शीर्षक- कलम के सिपाही
विधा -तुकांत कविता
कलम के सिपाही
वो कलम के सिपाही,तैं जागत रइबे।
नइ ए सोये के समे,तैं ताकत रइबे।
साहित्य के बगिइचा मा, कोनहो घुस जाही चोर।
कर लिही चोरी, तैं ताकत रइबे।
चलत रहय सिरजन के काम,झन रुके कलम के गति।
सूख जाही सियाही,तैं जाचते रइबे।
कलम मा ताकत हे,बम ले घलो जादा।
कही हो जही बिसफोट ,तैं मापते रइबे।
साहित्य के बगइचा के माली ,तैं काबर हो गे हस निरास ।
देख सूख जाही पउधा ,तैं सीचते रइबे।
व्याख्या- रचनाकार अपनी रचना के माध्यम से सृजन करने वाले कलम के सिपाहियों को सचेत रहने जागते रहने की अपील की है।
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