स्थान___नवापाराखुर्द/सकती
जिला_जांजगीर_चाम्पा
राज्य__छत्तीसगढ़
विधा---कविता मुक्तक
शीर्षक---पर्यावरण और हम
व्याख्या____प्रस्तुत कविता में पर्यावरण को शुद्ध,स्वच्छ ,उसका सीमित उपयोग करने की सलाह दी गई है पर्यावरण का उपयोग एवं विघटन मानव के द्वारा ही होता है ।
उसे बिना हानि पहुचाये संरक्षित सीमित प्रयोग करने की मंशा जाहिर किया गया है ।
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पर्यावरण और हम
पर्यावरण को स्वस्थ्य बनाओ।
अधिक दिनों तक जीवित रहोगे ।
वह प्रदुषित तुम प्रदुषित ।
जीवन से फिर सीमित रहोगे ।
पेड़ लगाओ हरियाली लाओ ।
शुद्ध वायु वर्षा को पाओ ।
पेड़ रहेंगे तब सुख बहेंगे ।
फल फूल पत्ते लाभ उठाओ ।
अपना साफ सफाई न देखो ।
औरों का भी ख्याल करो ।
घर का कचरा सड़क में डाल ।
खुद को न खुशहाल करो ।
नदी नाले मां के सामान ।
हरदम निर्मल बहती रहे ।
मेरे जैसे सबका संतान हो ।
देख हमें कहती रहे ।
धूल धूंआ न ज्यादा फैले ।
इसका समुचित रखो ज्ञान ।
सुरक्षित उपयोग करो इसका ।
इससे हम सबका कल्याण ।
सबका कारक मानव है ।
सबका वह दोहन करता ।
समझे समझ से काम लें ।
तब प्रकृत खुश रहता ।
अति का एक दिन अंत है ।
इस बात से बच रहना ।
पर्यावरण जीवन का अंग ।
जैसे प्राण वैसे रखना ।
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