Friday, May 22, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरबा से गोमती सिंह की रचना- शांति

रचनाकार का नाम- गोमती सिंह 
जिला- कोरबा छत्तीसगढ़ 
विधा-कविता 
शीर्षक--" शांति की विलाप " 
प्रस्तुत है कविता-


तड़प तड़प कर कह रही है शांति, 
अपने प्रियतम की तलाश में, 
जाने से पहले इतना तो बता देते ,
मैं रहूँ कहाँ  ?
क्या उस धर्मांन्ध के पास !
जो काट रहा है खुद के दुसरे हाँथ को ।
या कानून के उन ठेकेदारों के पास ! 
जो लुट रहे हैं देश की 
जनता को । 
नहीं! मैं अपना अस्तित्व मिटा लूंगी, 
मगर रहूँगी अपने प्रियतम मानवता की कुटिया में ।
मुझे शांति मिलेगी मानवता की आगोश में । 
      ।।इति।।


ब्याख्या--आजकल मनुष्यों में दिनों दिन मानवता खतम होती जा रही है ।
इसी को रचनाकार सजीव चित्रण करते हुऐ कह रही है --
जहाँ मानवता नही रहेगी वहाँ शांति भी रह ही नहीं सकती ।
शांति अपने प्रियतम मानवता की खोज करते हुए कह रही है -जानें से पहले इतना तो बता जाते कि मैं कहाँ रहूँ । क्या धर्म के लिए लड़ने वालो के पास ?  या कानून बनाने के उन जवाबदारों के पास जो  लूटते हैं देश की जनता को? नहीं मैं अपना अस्तित्व मिटा लूंगी मगर रहूँगी अपने प्रियतम मानवता की कुटिया में । इस कविता के माध्यम से रचनाकार कह रही है कि शान्ति का निवास वहीं हो सकता है जहाँ पर मानवता हो । 
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गोमती सिंह, कोरबा छत्तीसगढ़

2 comments:

  1. शांति की विलाप कविता के माध्यम से कवियित्री मानवता की तलाश कर रही है।जो अत्यंत प्राशंगिक है 👌👌

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