ग्राम-नंदेली,जिला -रायगढ़
विधा-कविता
प्यारे पति प्रेम के
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पत्नी बोली हे प्यारे पति,
प्रेम की क्या पहचान है।
साजन बोला सजनी से,
स्नेह श्रृंगार प्रेम नाम है।।
हे स्वामी,बिन स्वार्थ सत्य,
स्नेह,स्वभाव,प्यार समान है।
हे,अहोभाग्य,अर्धांगिनी,आज
अपने मन में क्यों आन है ।।
हे,हरिसम,मेरे दुखहरण,
हरना ही तो आपका नाम है।
धन्य तू,धरती सम,धीर धरन,
धरनी ही तो तेरा नाम है ।।
हे,चंचल नयन,चंचल पति,
आपके चरणों में मेरा धाम है
आपके प्यार का ही प्रमाण है
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