राज्य-पश्चिम बंगाल
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"सैनिक"
जब सारा देश सो रहा था नींद के आगोश में ।
वो दुश्मनों को दबोच रहे थे अपने बाहु पास में ।।
जब सारा देश मना रहा था झूम-झूम के होली ।
वो झेल रहे थे सीना तान के दुश्मनों की गोली ।।
जब हम लगा रहे थे रंग अबीर गुलाल ।
तब वो दुश्मनों का कर रहे थे बुरा हाल ।।
जब हम ठंड से ठिठुर कर ताप रहे थे आग ।
वो दे रहे थे घूम-घूम पहरा सारी रात जग ।।
कोई हिन्दू,कोई मुस्लिम,कोई सिख और ईसाई ।
सरहद पर लड़ते हैं सब मिल के भाई-भाई ।।
हर नौजवान के दिल से एक ही आवाज है आती।
बढ़े चलो-बढ़े चलो हे वीरों माँ भारती पुकारती ।।
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
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