Thursday, May 14, 2020

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार से डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर" की रचना- हमसफ़र

रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"
जिला - बलौदाबाजार(छ. ग.)
शीर्षक - हमसफ़र
विधा - मुक्तक कविता
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मुक्तक - मेरी हमसफ़र
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सभी गम दूर है मुझसे ,
सुखों का ताज मेरा है ।
जिसे पाकर हुआ मैं धन्य,
सुरक्षित आज मेरा है ।
है मेरी प्राण प्यारी ,
जान जिस पर मैं छिड़कता हूँ ।
वही है हमसफर मेरी ,
वही हमराज मेरा है ।

मेरे रग-रग में बसती है,
मेरी यह प्रेम थाती है ।
वो मुझसे प्यार करती है ,
यही हर पल जताती है ।
मैं जिसके प्यार में बनकर,
दीवाना जी रहा यारों।
लता है रूप की मेरी ,
रूपलता कहाती है।
★★★★★★★★★★
रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"

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