Thursday, May 14, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से श्रीमती पदमा साहू की रचना- कॉपी, कलम और कलमकार

रचनाकार- श्रीमती पदमा साहू
जिला- राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) 
शीर्षक- कॉपी, कलम और कलमकार
विधा- कविता

कॉपी,कलम और कलमकार का,
                  अनोखा,अटूट रिश्ता होता है।
संवेदनाओं का कलमकार की,  
                लेखनी से गहरा संबंध होता है।
लेखनी का स्याही,स्याही का कागज से,
                नाता बड़ा महत्व का  होता है।
बच्चों को सिखाने शिक्षक का संबंध,
             श्याम पट और चाक से होता है।
अक्षर ज्ञान के लिए विद्यार्थी का,
              काफी पेन से तागा गहरा होता है।
किसानों का दर्द, अमीरों का टशन,
         लेखक की कलम से पन्नों में दर्ज होता है।
गरीबों का दुख़,महामारी का तांडव, 
            प्रकृति चित्रण लिखने पर अमिट होता है।
वीरों की वीरता,लेखक के उभरते विचार,
             कलम से कॉपी में व्यक्त होता है।
लिखता वही है लेखक की लेखनी,
             जो अंतर्मन से देखा होता है।
कलम से लिखी आज के पन्ने,
           आने वाले कल के लिए इतिहास होता है।
कलम, कॉपी,कलमकार का कमाल है,
        यह निःशब्द शब्द को लेखनी सेआकार देता है।


__________________________________________
व्याख्या- मेरी कविता है कापी कलम और कलमकार । मेरी इस कविता का भावार्थ है कि, एक कलमकार अपनी लेखनी से अपने अंदर उमड़ते भावों को संवेदनाओं को अपनी लेखनी के माध्यम से काफी में एक नया प्रारूप प्रदान करता है। लेखनी का महत्व स्याही से होता है बिना स्याही के लेखनी व्यर्थ है और उसी प्रकार स्याही का महत्व कागज से हैं। स्याही जब कागज पर लिखी जाती है तो अमीट बन जाती है। वैसे ही एक शिक्षक का नाता श्यामपट्ट और चाक से होता है, जिससे वह बच्चों को जीवन की ज्ञान सिखाने के लिए प्रयोग करता है। और विद्यार्थी का नाता पेन और कॉपी से होता है वह बिना पेन और कॉपी के इसे नहीं सीख सकता है। मैंने अपनी कविता में यह भी लिखा है कि लेखक अपनी लेखनी से किसानों के दुख को सुख को और अमीरों की टशन और हमारे प्रकृति में होने वाले अनेक महामारी जैसे करोना का तांडव और साथ ही साथ प्रकृति का चित्रण और हमारे वीरों का वीरता पूर्ण कार्य इन सब का चित्रण कवि अपने लेखनी से करता है। हम कविगण वही लिखते हैं जो अपनी आंखों से और अपने अंतर्मन से घटनाओं को देखते हैं उनके भावों को हम अपनी लेखनी से पीरों कर काफी पर उतारते हैं और एक नया रूप देते हैं। लेखक अपनी लेखनी से निःशब्द शब्द को जिसके लिए कोई शब्द नहीं होता ऐसी बहुत सी भावनाएं होती है उनको एक नया आकार देते हैं। इस तरह मेरी यह कविता कलम, कॉपी और कलमकार तीनों के महत्व को बताती है।

श्रीमती पदमा साहू
जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...