जिला बेमेतरा (छ ग)
विधा कविता
शीर्षक ' मै मजदूर '
मै मजदूर मै मजदूर
रात दिन मेहनत करना,
यही है मेरा काम।
तब कहीं जाकर,
मिलता है मुझको।
दो वक़्त का भोजन।
मै मजदूर, मै मजदूर
मै हूं विशाल भवन बनाता,
पर खुद सिर पर छत को तरसता।
मै स्वादिष्ट पकवान भी बनाता,
पर उनको चख भी ना पाता।
मै मजदूर, मै मजदूर
मै आलीशान सोफें, दीवान बनाता,
पर मै खुद नीचे जमीन पर सोता।
मै खेतों में फसल उगाता,
पर दो वक़्त के खाने को तरसता।
मै मजदूर मै मजदूर
मेरे बिन कोई काम ना सम्भव,
मै कहलाता देश की मजबूत रीढ़।
फिर भी ना जाने क्यूं, कब तक,
दर- दर भटकने को रहुंगा मजबुर।
मै मजदूर मै मजदूर......
भावार्थ- एक मजदूर के बिना कोई काम सम्भव नहीं है, परंतु वही वर्ग आज सबसे ज्यादा उपेक्छित है आज वह दो वक्त की रोटी के लिए दर दर भटकने को मजबुर है। वर्तमान समय में ही जब लॉक डॉउन हुआ तो देश के हर कोने में मजदूर फंसे थे और उनकी स्थिति सोचनीय थी!!
🙏 सूर्य प्रकाश पाटिल🙏
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