Tuesday, May 19, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरबा से गोमती सिंह की रचना- जाग उठो

रचनाकार का नाम-गोमती सिंह 
जिला - कोरबा छत्तीसगढ़ 
विधा- कविता 
शीर्षक - "जाग उठो "
प्रस्तुत है कविता---
स्वर्ण रश्मि पड़ी धरा पर, 
नींद से जागी वसुंधरा ।
पंछी के कलरव की धुन सुन मुस्कुराई वसुंधरा ।

ताल में कमल खिल गये, 
पंछी चहकने लगे ,

ठंडी बयार के झोंके संग मिल ,
लहराई अब वसुंधरा ।

तब कहा विरंची ने ब्याकुल स्वर में, 

जाग उठो मेरे मानस पुत्रों! मत   सोओ तुम मद में इतना ।

सूरज चाँद को भेज धरा पर;

लेता हूँ नित तेरी सूचना, 

मत सोओ तुम मद में इतना । 
         ।।इति।।

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ब्याख्या--रचनाकार कार भोर की छटा को देखकर अत्यंत हर्षित मन से वर्णन कर रही है कह रही है --
सूरज की स्वर्ण (सोना ) जैसी किरण पृथ्वी पर पड़ने लगी है और प्रकृति ऐसे दिख रही है जैसे नींद से जाग उठी है । 
ताल में कमल खिल गये हैं  और पक्षीवृंद चहकने लगे है ।
और ठंडी हवाओं के संग मिल  कर धरा लहराने लगी है । 
तब परमब्रम्ह परमात्मा कहने लगे अपने उन मानस पुत्रों को कि उठो मेरे पुत्रों तुम मद में  मत सोओ । मैं सूरज और  चाँद को पृथ्वी पर भेज कर तुम्हारे कर्म की सूचना लेते रहता हूँ  । उठो अपना पुरुषार्थ करो ।
इस तरह से रचनाकार ने प्रकृति का सजीव चित्रण किया है । 
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गोमती सिंह, कोरबा छत्तीसगढ़

2 comments:

  1. प्रकृति और मनुष्य के संबंधों को दर्शती बहुत सुंदर कविता👌👌👌

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  2. प्रकृति जो हमारी मां है अंतिम समझाइश दे रही है समय है अभी भी संभल जाओ

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