जिला - कोरबा छत्तीसगढ़
विधा- कविता
शीर्षक - "जाग उठो "
प्रस्तुत है कविता---
स्वर्ण रश्मि पड़ी धरा पर,
नींद से जागी वसुंधरा ।
पंछी के कलरव की धुन सुन मुस्कुराई वसुंधरा ।
ताल में कमल खिल गये,
पंछी चहकने लगे ,
ठंडी बयार के झोंके संग मिल ,
लहराई अब वसुंधरा ।
तब कहा विरंची ने ब्याकुल स्वर में,
जाग उठो मेरे मानस पुत्रों! मत सोओ तुम मद में इतना ।
सूरज चाँद को भेज धरा पर;
लेता हूँ नित तेरी सूचना,
मत सोओ तुम मद में इतना ।
।।इति।।
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ब्याख्या--रचनाकार कार भोर की छटा को देखकर अत्यंत हर्षित मन से वर्णन कर रही है कह रही है --
सूरज की स्वर्ण (सोना ) जैसी किरण पृथ्वी पर पड़ने लगी है और प्रकृति ऐसे दिख रही है जैसे नींद से जाग उठी है ।
ताल में कमल खिल गये हैं और पक्षीवृंद चहकने लगे है ।
और ठंडी हवाओं के संग मिल कर धरा लहराने लगी है ।
तब परमब्रम्ह परमात्मा कहने लगे अपने उन मानस पुत्रों को कि उठो मेरे पुत्रों तुम मद में मत सोओ । मैं सूरज और चाँद को पृथ्वी पर भेज कर तुम्हारे कर्म की सूचना लेते रहता हूँ । उठो अपना पुरुषार्थ करो ।
इस तरह से रचनाकार ने प्रकृति का सजीव चित्रण किया है ।
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गोमती सिंह, कोरबा छत्तीसगढ़
प्रकृति और मनुष्य के संबंधों को दर्शती बहुत सुंदर कविता👌👌👌
ReplyDeleteप्रकृति जो हमारी मां है अंतिम समझाइश दे रही है समय है अभी भी संभल जाओ
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