Thursday, May 28, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से प्रवीण कुमार ठाकुर के दोहे

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रचनाकार -- प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला -- राजनांदगाँव (छ.ग.)
विधा --- दोहा 
शीर्षक --" मानुष जीवन साज "
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।।१।।
सरग नरक मन त्याग  के ,
   सकल सफल  कर  काज ।
      सकल करम फल है यहीं ,
          मानुष   जीवन  साज ।।
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।।२।।
          द्वेष  दंभ छल त्याग  के,
      सत्य पंथ चल आज ।
   राह यही है जीत का ,
सहज सरल है राज ।।
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।।३।।
नित्य जीव निज है जिया,
   कृत्य   करे  है   पाप  ।
      पर हित को निज है हिया ,
         सफल  जीव  है  आप ।।
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।।४।।
         सुख दुख दो तट है नदी ,
       मध्य  बहे  जल  धार ।
   सत्य निष्ठ पतवार से ,
भव  तर  जाएं पार ।।
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।।५।।
विटप समहि कर नेक तू ,
     सर्व   करो  बलिदान  ।
         प्राण वार कर देखना ,
           बढ़ता   कैसे   मान  ।।
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।।६।।
         नैतिकता  कर  थामना ,
      दोष  दर्प  पर   वार  ।
   व्यथा विपत कर सामना ,
सत्य  वचन  ना  हार  ।।
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।।७।।
दीन  हीन  पर  हो  दया ,
   करो   स्त्री   का    मान ।
      स्वर्ग धरा बन जायगा  ,
         रहे   सदा   ये   भान ।।
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।।८।।
        तरुवर से जल जीवना ,
      जल बिनु जीवन सून ।
   कुसुमित हो घर आंगना ,
 उपवन  वन  में  फूल ।।
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।।९।।
पंगु  करो उपहास ना ,
   ना ताना   कृशकाय ।
      सबसे हो सम भावना ,
         सबके  मन  को  भाय ।।
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।।१०।।
         रूप मन का हो आइना ,
      जैसे   होते   संत   ।
  दर्प करें किस बात का ,
सबका  होए  अंत  ।।
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रचनाकार ✍🏻
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प्रवीण कुमार ठाकुर 
मोबाइल नं -९६१७४४०२६८
पतोरा ,राजनांदगांव (छ.ग.)  ।
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व्याख्या  :---
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प्रस्तुत दोहा के माध्यम से मैंने जीवन के वास्तविक मूल्यों की संक्षेप में व्याख्या करने का अदना सा प्रयास किया है । साथ ही यदि मानव अपने स्वार्थ को त्याग दे तो हमारी यही धरा स्वर्ग तुल्य हो  सकती है । अपनी करनी का फल हमको यहीं मिलना है  ।।

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