Wednesday, May 27, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से प्रवीण कुमार ठाकुर की रचना

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प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला - राजनांदगाँव (छ.ग.)
विधा - कविता (पर्यावरण पर)
शीर्षक -  "वृक्ष धरा का सबसे सुंदर उपहार "
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वृक्ष धरा का सबसे  सुंदर  उपहार
जीवन भर करते  हम पर उपकार
मानव जाति अपनी आदत सुधार
आज बढ़ते समय की  यही पुकार
 
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पेड़ जीव जंतु का  जीवन आधार 
पेड़  बिना सब सूना है घर  संसार
पेड़ लगाओ सब यही करो विचार
संरक्षणवृक्षारोपण पर करो विचार

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वृक्ष पर  निर्भर  सारा  जन जीवन
वृक्ष से है सब वनजीव वन उपवन
वृक्ष से तो  है  हमारा मरण  जीवन 
हे स्वार्थी मानव तू जरा कर चिंतन

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वृक्ष लगा धरती का नव श्रृंगार कर
उपकारों का जरा तुम तो ध्यानधर
प्रकृति  के  उपहारों  का मान  कर
वृक्ष लगा धरा का नित श्रृंगार  कर

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ये कार्बन डाई आक्साइड को 
निगल लेते हैं
आक्सीजन हम सबको हरदम ही  
देते हैं 
सोंचो बदले में हमसे क्या कभी 
कुछ लेते हैं
अर्पण हमको सारा जीवन वृक्ष कर देते हैं 

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पेड़ पौधों से हमें पौष्टिक फलाहार मिले
नित नव सेहत का हमें नया संसार मिले
पथ चलते राहगिरों को शीतल 
छांव मिले 

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वृक्ष लगाऐं हम इनका करे जतन 
सेवा करे हम इनका तन मन धन
वृक्ष ही तो हम सबका  है   जीवन
मिल कर ही करें जीवन का जतन

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चलो चलें हम वृक्ष लगाऐं 
धरती का आंचल सजाऐं
मरु धरा को उर्वर  बनाऐं
हम इनका रक्षक बन जाऐं ।।

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 व्याख्या  :--

             प्रस्तुत कविता में वृक्ष का पर्यावरण के संतुलन में क्या उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है और वृक्ष का पृथ्वी के जीव जंतु पर क्या उपकार है को दर्शाने का  एक छोटा सा प्रयास किया गया है ।।
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