रचनाकार -- प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला -- राजनांदगाँव ( छ.ग.)
विधा -- गीत
शीर्षक -- "वक्त गुजरा हुआ "
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वक्त गुजरा हुआ ,
फिर याद आया ।
कोई भूला हुआ ,
फिर याद आया ।।
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भूलने की कोशिश में ,
दूर होते गए ।
ये दुरियां ही ,
हमें करीब लाया ।।1।।
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भूला भी नहीं उन्हें ,
याद करता भी नहीं ।
भूलने की कोशिश ने ,
दिल में कहर ढा़या।।2।।
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वो तो कहते हैं बेखबर ,
हम उनसे हो गए ।
उनकी बातें ही ,
दिल जिगर में छाया ।।3।।
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तस्वीर दिल में ,
आँखों में बरसात है ।
प्यास आँखों में ,
हमने कोई पाया ।।4।।
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वक्त गुजरा हुआ ,
फिर याद आया ।
कोई भूला हुआ ,
फिर याद आया ।।
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व्याख्या --
उपरोक्त पंक्तियों में मैने प्रेम की उस स्थिति को उकेरने का प्रयास किया है जब
प्रियतमा अपनी प्रियतम से बिछड़ जाती है तब उनके ह्रदय की दशा क्या होती है ।
दोनों ही बिते हुए क्षण और भूले , बिछडे़ साथी को याद करते हैं ।
आऔर भूलने की कश्मकश में वे यादों के सहारे और भी अधिक करीब आ जाते हैं ।
पहले तो दोनों ही ना तो एक दुसरे को स्मरण करते थे ना ही भूले थे ,
परन्तु भूलने की कोशिश ने विरह अग्नि को और भी प्रबल कर दिया ।दोनों ही एक दुसरे पर भूल जाने का मिथ्या दोषारोपण करते हैं पर ऐसा नहीं है , इन दोनों के दिल दिमाग मे हर जगह वे ही समाहित
होते हैं ।
दोनों के मन में विरह के कारण साथी की ही मूरत मन में बसी थी
और नैन एक झलक के लिए प्रियतम ,प्रियतमा के निरंतर अश्रु बरसात करते हैं इसके बाद भी आँखों में यार के लि कैसी प्यास थी ।।
रचनाकार
प्रवीण कुमार ठाकुर
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बहुत बड़िया गीत सर् जी
ReplyDeleteबहुत सुन्दर ठाकुर सर ऐसे ही उत्कृष्ठ रचनाएँ सृजन करते रहें मेरी ओर से शुभकामनाएं हैं।
ReplyDeleteHar Dil ke ahsas ko chhu jayegA badhiya
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