जिला :- कांकेर
विषय :- अद्भुत रस
स्थायी भाव :- अचरज<
शीर्षक :- विराट स्वरूप
~ ● *विराट स्वरूप* ● ~
महाभारत के महासमर में,
श्रीकृष्ण ने दिखाया अद्भुत रूप।
शरीर कंपित हो मूर्च्छित हुए,
देख हरि का विराट अलौकिक स्वरूप।
थी दिव्य ज्योति बड़ी प्रचंड,
जिससे प्रकाशित हो उठा ब्रम्हांड।
नाना रूप अद्भुत विराट स्वरूप लिए,
नेत्र अनेक, उदर अनेक बहुरूप लिए।
मुख में अनल प्रज्वलित होकर,
दुराचारियों को निरंतर प्रवेश दिए।
महाकाल,महाप्रलय सा विशाल रूप लिए,
बारह आदित्य,ग्यारह रुद्र माधव समाहित किए।
देव,गन्धर्व,यक्ष सब एक जगह एकत्र हुए,
अगम,अपार स्वरूप देख अर्जुन विस्मित भए।
महाभारत के महासमर में,
श्रीकृष्ण ने दिखाया अद्भुत रूप।
व्याख्या-महाभारत के युद्ध में अर्जुन का का अज्ञान दूर करने श्रीकृष्ण ने अपना विराट रूप दिखाया ,जोअद्भुत और अलौकिक था।जिसमें सारा ब्रह्मांड समाया देख अर्जुन कांपने लगा और मूर्च्छित हो गये।आश्चर्य चकित हो गए।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ. ग.)
No comments:
Post a Comment