Thursday, May 28, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरिया से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- चरित्र

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर,जिला _कोरिया
छत्तीसगढ़।
शीर्षक_आओ अपने बच्चों को, चरित्र गढ़ना सिखाएं।

आओ अपने बच्चों को, चरित्र गढ़ना सिखाएं ।


आज के युवा पीढ़ी
चढ़ रहे, बस फैशन की सीढ़ी
बच्चे से लेकर किशोर सभी
मोबाइल पर रहते हैं बिजी
क्योंकि यदि मोबाइल न हो तो
बच्चे खाना नहीं खाएंगे
किशोर भी नाराज हो जाएंगे
जब टिक टोक नहीं बनाएंगे
बाकी तो पता ही है जो बड़े हैं
ओ फेसबुक, व्हाट्सअप में रमे हैं
केवल पुरुष वर्ग ही नहीं
महिलाओं के भी यह पसंदिता
औजार है।
बाकी श्रृंगार भूल भी जाएं पर
मोबाइल के बिना, संवरना
शायद बेकार है।
हर घर का यही हाल है
मैं नहीं कहती कि मेरा घर
भी इससे अछूता है
मोबाइल नामक लत की
यहां तो होती पूजा है
करती हूं उम्मीद कि क्यों न
हकीकत में जिया जाए
मोबाइल से परे भी है दुनिया
क्यों  न उसे देखा जाए
नैतिक मूल्यों को बच्चों के
व्यवहार में उतारा जाए
संस्कारवान बनाने का
क्यूं न संकल्प लिया जाए?
सबसे पहले अपनी संस्कृति का
सम्मान कराना सिखाएं
पश्चिमी सभ्यता का यूं
आंख मूंद अनुसरण करना
छुड़ाएं,
अपने पर्यावरण का रक्षण
करना सिखाएं
एक पौधा लगाने और उसकी
देखभाल करना सिखाएं
भाई चारे की भावना को जीना सिखाएं
नारी जाति का सम्मान करना सिखाएं
जीव जंतओं पर भी
दया करना सिखाएं
आओ सब मिल अपने बच्चों को
उन्नत चरित्र गढ़ना सिखाएं

तारा पांडेय"मुक्तांशा"

1 comment:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...