Greater Noida U.P
दुनिया एक खेल तमाशा
बंद कर दे इस आडम्बर को
बेवजह इस खेल तमाशे के
इतने बड़े समुन्दर को
आँखे तेरी क्या रोती नही हैं
देखा हर पल एक नए हादसे को
हर कोई बना बैठा धम॔ का ठेकेदार है
जिगर में छिपी तलवार और मुह में राम राम है
हर कोई खुद को समझे खुदा
इनसानियत से है मीलो जुदा
तेरी बनाई इस दुनिया में सच की हुई बिदाई है
झूठे का है बोल बाला उसी को मिली बड़ाई है
पैसे की हुई ताज पोशी दौलत ही बलवान हुई
दिलो में है वैर भरा अब खून से ना होती सिचाई इसकी
भाई भाई है बात पुरानी
रिशतों में है दरार पड़ी
औरत की क्या बात कहें
चौराहे पर उसकी इज्ज़त उतरी
लैला मजनू ऋ फरहाद
ये सब नाम पुराने हुए
धोखा धड़ी मतलब की दुनिया में
मुहब्बत के नाम पर कभी किसी का दिल टूट
हर पल कोई आतमा रोए
सांसो की कीमत नही कोई
चार पैसो से कतल- ए- आम हुए
गीता की झूठी कसमें खाना
आज यहाँ रिवाज़ हुए
इनसान अब हैवान हुआ है
हर रिशतो यहाँ बदनाम हुआ है
गुरूद्वारे मंदिर मसजिदो में
भजनो की जगह तलवारें चलें
ऊँ अल्ला वाहेगुरू का जाप नही
वहाँ गाली गिलोच की धूल उड़े
हवाओ में भी वैर भरा है
चाँदनी तेरी चुभने लगी
सुरज में वो तपिश कहाँ
जलाना उसकी नियत हुई
पानी तेरा अमृत नही अब
दुनिया की उसमें मैल भरी
कागज़ के अब फूल हुए हैं
खुशबू में भी उनकी मिलावट हुई
मुह में हर निवाला जो जाता
बीमारी का वो पैगाम है लाता
दौल की भूख में नंगा
आज तेरा इनसान हुआ
इनसानियत से है मीलों दूर
आतमा भी उसकी चूर चूर
खामोश अब भी क्यों तेरी जुबा है
देख ये संगीन नजारे को
दिल तेरा क्यों ना परेशान है ?
इनसानो सा क्यों बना पड़ा है ?
इनसानो का क्या असर हुआ है ?
इस से पहले कि खुदाई तेरी
इनसन करदे निलाम कहीं
रोक दे इस आडम्बर को
बेवजह इस खेल तमाशे के
इतने बड़े समुद्र को.....
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