Monday, April 20, 2020

छत्तीसगढ़ से नलिनी बाजपेयी की रचना- संस्कार

कवियित्री-नलिनी बाजपेयी
शीर्षक:- *संस्कार*
राज्य:- छत्तीसगढ़


 *संस्कार*
००००००
भारतीय सभ्यता संस्कृति
 है कितनी महान,
वहीं से संस्कार गढ़ते ,
विश्व करता जिसका गुणगान।

संस्कार ही है भारत की पहचान,           
वेद पुराणों से सीखा है इंसान।
ऋषियों से प्रेरित जीवन शैली,
मानवता है इसकी जान।

ये धरा है पावन ,
जहां जन्में है भगवान,
पाश्चात्य सभ्यता अपना 
करते झूठी  बखान।

कौन कैसा है,?
कोई क्या कैसे जानेगा?
सदवाणी, और संस्कारों से 
ही होगा भान।

पापाचार,पराभव,
पतन का ना कोई स्थान।
जन्म से मृत्यु तक सोलह 
संस्कारों का है विधान।

इन्ही संस्कारों के बल से 
भारत बनता महान,
संस्कार है देश की 
आन बान और शान । 

संस्कारों से भारत को 
जानता जहान,
इसीलिए सब कहते 
भारत देश महान।

भारतीय सभ्यता संस्कृति
 है कितनी महान,
वहीं से संस्कार गढ़ते
विश्व करता जिसका गुणगान।
- - - - - - - - - - - - - ✍🏻

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर (छ .ग.)

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