अलीगढ़ , उत्तर प्रदेश
शीर्षक -:. गरीबी में आशा की किरणें
अनाज नहीं है घर में उनके ,
है नहीं कोई अन्य विकल्प ।
भूखे नंगे बिन मकान के ,
क्या लेगा कोई संकल्प ।।
निर्वस्त्र घूमता तन उघाड़कर ,
चहुँ ओऱ देखता स्वप्न किरण ।
बिना अर्थ बिन धन वैभव के ,
नहीं सूझती कहीं शरण ।।
क्या रोते रहें भाग्य पर अपने ?
या कुछ करने हैं ऐसे कर्म ।
इस गरीबी के निःशब्द चिह्न को ,
दूर हटाना है अपना धर्म ।।
अर्थ रहित इस दंश से उबरें ,
करें पूर्ण हम स्वयं निज स्वप्न ।
बच्चे शिच्छा उच्च ग्रहण करें ,
हो अपना यह स्वच्छ प्रयत्न ।।
हैं गरीब पैसे से तो क्या ,
मत होना मन से निराश ।
श्रेष्ठ शस्त्र है मन यह तेरा ,
हर दुविधा में रखना आश ।।
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