Friday, April 3, 2020

छत्तीसगढ़ से गुलाब सिंह कंवर"गुलाब" की कविता

गुलाब सिंह कंवर"गुलाब"
छत्तीसगढ़
जागो चेतव , घर में रहव
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(को रोना, मा का-का होगे)

गांव शहर   हर  सूना  होगे।
मंहगाई   हर   दुगुना  होगे।
कहां ले आगीस बैरी करोना,
मुड़ धर के अब गुनना होगे।।

चारो डहर गोठ ,कोरोना होगे।
गरीब, मजदूर के तो रोना होगे।
नाक, मुंह ला तोप ढ़ंक  लेवा,
घेरी-बेरी हाथ ला धोना होगे।।

काम बूता अउ , अढ़िया चाही।
नइ  कमाही  त  काला  खाही।
पेट के चिंता  मा नींद  कहां हे,
 न,दिन बितय, कैसे, रात पहाही।।

काम- बुता  तो सबो ठप परे हे।
मनखे  जमो  हाथे-हाथ धरे हे।
घरे मा रहो  कहां तैं हर  जाबे,
चारों कोना म येदे पुलिस खड़े हे।

अमीर के घलो मुड़ पिरोना होगे।
टीवी, मोबाईल हर खिलौना होगे।
बन्द परे हे  दुकान-, मकान, संगी,
बिस्तर मा दिन भर सोना होगे।।


अफ़वाह मा ,न इ  पड़ना हे,।
कोरोंना ले घलो नइ डरना हे।
नियम के पालन करो जी संगी,
वादा करो,  नइ   मुकरना  हे।


जान   हावय त  जहान हावय।
मोर देश के मनखे महान हावय।
लाक डाउन के पालन करो जी,
नइ   तो  बड़े नुकसान हावय।।

सरकार हमर बर गुनत हे भारी।
ये बीमारी  तो हावय महामारी।
चेतव, जागो सबो घरे मा रहो,
गंभीर बनव मोर जमों संगवारी।



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