Monday, April 6, 2020

छत्तीसगढ़ से महेंद्र सिंह की रचना- कोरोना

कवि का नाम - महेंद्र सिंह 
राज्य- छत्तीसगढ़ 
शीर्षक - कहर कोरोना 
सम्पर्क- 9424139776


“ कोरोना ”

ना गली ना शहर, दुनिया में है कहर।
ना कोई समझा है , ना किसी ने जाना है।
अब सभी को बताना है , हाथ धोकर खाना है।
बस कूछ  पल  का रोना है ,जब तक "कोरोना "है।
कौन हिन्दु ,कौन मुसलमां ,कौन सिख कौन इसाई है।
विकट है स्थिति अब जमाने का ,और सबो को बताने का,
अब घरो पर रहना है
बस कूछ पल का रोना है ,जब तक "कोरोना" है
विपदा के मार को , हरने को सरकार है
अज्ञानता के अंधकार मे , जन जन बेकरार  है
अब सबो को दरकार  है , दूरियो मे उद्धार  है
बस कूछ पल का रोना है ,जब तक " कोरोना " है
अन्धविश्वास को न रटाना है , एक दुजे को जगाना  है
और अब ना सोना है ,  बस हाथो  को धोना  है
बस कूछ पल का रोना है , जब तक “कोरोना” है
अब "कोरोना" को हराना  है , कोई रोना है ना सोना है
अब “ कोरोना “ को हराना है ,कोई रोना है ना सोना है

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