कर्नाटक
गुफ्तगू
आ ,बैठ मेरे साथ माँ,
और हर वो बात बता।
जब भी टूटते थे तेरे सपने,
कैसी गुजरती थी रात बता।।
तूने अपने सपनों को,
मेरे सपनों से जोड़ दिया।
हर टूटे सपने से ,
जुड़े तेरे जज्बात बता।।
आज सपना मेरा जो टूटा है,
मैं तेरा दर्द समझती हूँ।
नहीं कहूँगी आज मैं ,
कि बाद में बात करती हूँ।।
आ, आज तेरे सपनों को ,
फिर से नई उड़ान दूं मैं।
तेरे जंग लगे अरमानों को ,
रेंत कर संवार दूं मैं।।
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