Thursday, April 30, 2020

उत्तरप्रदेश से अन्जना झा की रचना- बीते पल

नाम-अन्जना झा
नोएडा (उत्तर प्रदेश)
शीर्षक- बीते पल

चलो बीते हुए पलों को  आज फिर से जी लेते हैं,
साथ बैठ कर सभी के फिर से चाय पी लेते हैं ।

उन पलों में पूरी जिंदगी जीया करते थे , 
जब दोस्तों के साथ बैठ सारे गम पीया करते थे।

घंटों टीवी पर धारावाहिक चलता था,
तो पापा की डांट पर किताबों का पन्ना पलटता था।

भाई-बहनों की गोष्ठी का अपना ही टशन था,
तो रात में ताश के साथ चाय  का अपना ही जश्न था।

सुबह निकल रात लौटा करते थे,
तो पापा के डर से रास्ते भर कांपा करते थे।

उफ़ क्या कहें! वो पल भी क्या पल थे
जब गर्मी की छुट्टी में  ननिहाल-ददिहाल  जाया करते थे 
और नानी-दादी के हाथ से मालपुआ  खाया करते थे।

बेफिक्र हो बड़ी चौड़ में  कॉलोनी घूमा करते थे, 
क्योंकि उस वक़्त रावण खुले आम ना घूमा करते थे।

खाली रास्तों पर गुल्ली-डंडा खेला करते थे। 
तो सखियों के साथ घर-घर खेला करते थे।

चलो बीते हुए पलों को  आज फिर से जी लेते हैं,
साथ बैठ कर सभी के फिर से चाय पी लेते हैं ।

14 comments:

  1. Beautifully written about Golden old days.. You took me back to those precious days when we use to enjoy every single moment of our life.. so contended we were at that time.Feeling nostalgic☺️👏

    ReplyDelete
  2. Very nice poem. Truly reflecting our life. It really took me to memory lane of cherishable moments of childhood in context of present corona time to recreate and live those moments again and enjoy life. 👌👌👌👌👌👏👏👏👏👍👍👍👍

    ReplyDelete
  3. Every word looks like straight from the heart ..

    ReplyDelete
  4. Yes Dear we all missing that wonderful time. But feel very sorry that time never come back. That's GOLDEN time dear. Keep it up Love u all of U. Sunil Panipat

    ReplyDelete
  5. क्या ख़ूब यादें बटोर के.... सुन्दर शब्दों से सजा के.... परोसी हैं आपने.... इनकी खुशबू ही कमाल है।

    ReplyDelete
  6. बहुत खूबसूरती और सादगी से बयां किया सादगी भरे ज़माने कि बात ! शुक्रिया याद दिलाने का कि रुक कर जी को ये पल , कि को भी है वो इसी पल में है ।

    ReplyDelete
  7. बहुत खूबसूरती और सादगी से बयां किया सादगी भरे ज़माने की बात ! शुक्रिया याद दिलाने का , की रुक कर जी लो ये पल ,क्यूंकि जो भी है, वो इसी पल में है ।

    ReplyDelete
  8. Rewinded the golden days 😊 well written .keep the good work going dear

    ReplyDelete
  9. Very well written Anjana. Total nostalgia, our childhood ...simple and confined with less still full of happiness.....keep it up🙌🙌👌👌

    ReplyDelete
  10. So heart warming...
    Is chai ki pyali ne, un palo kau aisa joda hai..
    Mann ka woh kona, bachpan kau fir se jee utha hai.

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...