Thursday, April 30, 2020

उत्तरप्रदेश से जितेन्द्र"हमदर्द" की रचना- लक्ष्य

जितेन्द्र"हमदर्द"
उत्तर प्रदेश
लक्ष्य
8953191518
लक्ष्य
एकता बसी जब जग में।
प्रकाश दिखे काले नग में।
बहुत दुर्बल लक्ष्य बना लो,
बस बढ़ता जा अपने रग में।

देश की सेवा में  घूम रहे,
समाज को संभालो ना।
अपने इरादे नेक कर के,
जग का पुण्य कमा लो ना।

क्या लाया जो लेकर जायेगा।
कमाया हुआ धरा रह जायेगा।
भूल जा अपने स्वार्थ को बंदे,
स्वार्थ धरा,तू निकल जायेगा।

मौन मेरी बेबसी नही,
लक्ष्य तक मैं शांत रहा।
थी लगन कुछ करने की,
बस इसलिए एकांत रहा।


निराश मत हो श्वास रहते,
लक्ष्य पाने को उठ जा अब।
मुश्किलें कुछ भी आये तो,
दहाड़ के बोल हट जा अब।

पाने की जिद हो बसी जब
त्याग का मोड़ आ जाता है।
पहेली कितनी बुझे जिंदगी,
लक्ष्य भेद का तोड़ आ जाता है।
जितेन्द्र"हमदर्द"

1 comment:

  1. Very beautiful. Anjana, truely reflects on your skill and talent. Keep it up dear. Would be waiting to read more of your posts.

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