नई दिल्ली
सकरात्मक सोच
चिंतित क्यों हो आपदा से, तुमको पता नहीं
सृष्टि का यही है कि कुछ भी रुका नहीं
सुख का अगर घर नहीं है कोई, गम का पता नहीं
रात अगर ना काली हो तो सूरज जलता नहीं
जीवन ये अन्मोल है, करना कोई खता नहीं
बाहर कोई जाए तो देना उसको बता यही
शीत न जाये जब तक, देखो ग्रीष्म आता नहीं
राम राज नहीं होता गर रावण सताता नहीं
वतन के लिए कुछ करना हो तो,अवसर है सही
जीतेंगे इस जंग को भी हम दे दो जाता यही
प्रेम नहीं कम होता, अगर कोई पास बुलाता नहीं
दूरी बनाये रखने से कोरोना आता नहीं
Nice मित्र
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