राज्य-छत्तीसगढ़,जिला- महासमुन्द
शीर्षक-विश्वास का बीज बो रहा भारत
भले आज दीवाली न थी,दीपों से जगमगाया भारत।
उम्मीद व आशा की नई किरण से,सराबोर नहाया भारत।
एकता की ताकत का पाठ, पूरे विश्व को पढ़ाया भारत।
संकल्प,दृढ़ इच्छाशक्ति, एकता की मिशाल दिखाया भारत।
पूरी सृष्टि डगमगा रहा तो दीयों से जगमगा रहा भारत।
विपदा की इस तमस बेला में खुशियों की सुंगध फैला रहा भारत।
शंख,घंट,ताली,थाली की गूंज से गुंजायमान हो रहा भारत।
आशा की नई किरण बनकर विश्वपटल में उदयमान हो रहा भारत।
संकट की घड़ी में धैर्यता की मिशाल बना रहा है भारत।
उम्मीदों की डोरी न टूटे,आस व विश्वास का सेतु बना रहा है भारत।
अपनों परायों की फिक्र छोड़,उम्मीदों का बीड़ा ढो रहा है भारत।
भले पूरी दुनिया उम्मीद खो रही,विश्वास का बीज बो रहा है भारत।
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
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