रायपुर, छत्तीसगढ़
शीर्षक - जिंदगी तू ही बता
जिंदगी तू ही बता
घोर अँधियारा चारों ओर
नीरव निशी है घनघोर
इसका कोई ओर ना छोर
नहीं कहीं सुनहरी भोर...
क्या हो गई मुझसे खता
जिंदगी तू ही बता
प्रेम ही माज़ी प्रेम ही कश्ती
प्रेम प्रतिज्ञा प्रेम ही भक्ति
प्रेम नहीं कोई आसक्ति
प्रेम ही इस जोगन की शक्ति
क्योँ तू रही मुझे यूँ सता
ज़िंदगी तू ही बता...
रश्मि....
अतिसुंदर,.......लेकिन जिदंगी कहाँ किसी को बताने आती है,..... वैसे आपने अपने प्रश्नों का जवाब भी कविता में ही दे दिया है.....बहुत खूब
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