*राज्य- छत्तीसगढ़
*कविता का शीर्षक- भूख
*भूख सचमुच
बहुत बेशर्म होती है
न महामारी का भय जानती है
न कोई मजबूरी समझती है
वो तो बस खाना माँगती है,,
आज एक माँ की भूख
जोर- जोर से चिल्ला रही थी
कि बिना पेट भरे छाती से दूध कैसे उतरेगा ?
आठ दिन की बच्ची भूखी है,,,,
अब क्या करे वह माँ,
खाना मिलने का इंतजार,,,,?
या अपने आँसुओं को ही अपना आहार बना ले,
जिसके खारेपन से शायद उसका रक्त
दूध की मीठी बूँदों में बदलकर
उसकी छाती से उतर आए,,,,,
रेणुका तिर्की
नि:शब्द!
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