प्रशान्त कुमार"पी.के."
संगीत
संग गाये मीत कोई, बस वहीं संगीत है,
मन उमंग तरंग लहराए, वही संगीत है।
वफ़ा, बेवफा, प्यार, रंजिश,दर्दे दिल की दवा,
भावनाओं को बहाए बस वहीं संगीत है।
नीर, नदियां और झरने या समन्दर के किनारे
गीत बनकर साथ दे जो बस वही संगीत है।
हर कदम हर एक पल पर हमदम हमारा जो रहे,
चाहें कोई जिंदगी की हार है वो या कि कोई जीत है।
राष्ट्र, धर्मभक्ति भाव हों, या सैनिकों की शहादत,
स्वर,लय, ताल में जो गुनगुनाये, बस वहीं संगीत है।।
मन उमंग........
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