Monday, April 20, 2020

छत्तीसगढ़ से परमानंद निषाद की रचना

नाम- परमानंद निषाद
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला- बलौदा बाजार
शीर्षक- तेरे माथे की चमक देख के चांद भी शरमा गया



*तेरे माथे की चमक देख के चांद भी शरमा गया.......*
                *(1)*

तेरे माथे की चमक देख के
चांद भी शरमा गया, 
दोस्तो को मेरी बात थोड़ा बहुत आ गया।
पर बिन बाल के खोपड़ी देख के सूरजमुखी भी शरमा गया,
ये माथे को ही पाता है ये कैसा चमक छा गया।
माथे की चमक को गोरीयों की मुह की चमक पर छा गया,
और मेरे माथे मे ये सुनहरा चमक आ गया ।।

                *(2)*

यादों की चमक माथे पर
जीवन वह नही जो हमे मिला है,
जीवन वह है जिसका हम निर्माण करते है।
खुशी वह नही जो हम पैसे से खरीदते है,
खुशी तो वह है जो हम बिना मांगे देते है
गम वह नही जो हमे मुश्किल देते है,
गम तो वह है जिसे हम मुश्किल समझते है।
याद वह नही जो हम पल-पल याद करते है,
याद तो वह है जो हम भुलाये आ जाते है।
मेरे माथे की चमक देख के
चांद भी शरमा गया
दोस्तो को मेरी बात थोड़ा बहुत आ गया,
पर बिन बाल के खोपड़ी देख के सूरजमुखी भी शरमा गया।
ये माथे को ही पाता है ये कैसा चमक छा गया,
माथे की चमक को गोरीयों की मुह की चमक पर छा गया।
और मेरे माथे मे ये सुनहरा चमक आ गया ।।

परमानंद निषाद

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...