Wednesday, April 8, 2020

मध्यप्रदेश से संजय पटेल की रचना- एक शाम

मध्यप्रदेश
संजय पटेल
 एक शाम

 तुम्हारी बुनी शाम के
एक तागे को खीच कर देखा
पूरी की पूरी रात उधड़ आई

हर दफ़े ऐसा ही होता है
जिस भी शाम थामता हूँ
तुम्हारी यादों का कोई सिरा
पूरी रात गुजर जाती है
जागे अहसासों को सुलाने में

सच बतलाना तुम
कितनी रातें गूँथ रखी हैं 
तुमने एक शाम की माला में
                         संजय

1 comment:

  1. यादों का एक सिरा थाम के देखो

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