देवगांव तमनार छत्तीसगढ़,
मोबाइल 9303489723
कविता
दहेज के लालच में मार देते है अपने बहु को ,
वो लोग पहचान नही पाते जिगर के लहु को,,
फिर शुरू होता है दो परिवारों में जंग,
निकल जाता है वो खुशी मेहंदी के रंग,,
क्यों नहीं जानते ऐसा करना गलत है ,
ये जमाने की नहीं लोगो की बुरी लत है,,
जलाने वाले क्या जाने आंसू और तड़प को ,
जिन्हें चलना नही आता दोषी देते सड़क को ,,
कितने अरमान लेके आती अपने ससुराल को ,
कुछ दिन हुए ही नही आती दहेज सवाल को ,,
जरा ये भी सोचे बहु भी किसी की बेटी है,
जो हर शाम खाने में रोज ताने ही लेती है ,,
ये प्रश्न वाचक चिन्ह बना है जाति समाज मे ,
कितना फर्क रहा है आज कल और आज में ,,
ये समझ लो बस दहेज में बहु का संस्कार है ,
एक प्रेम ही सत्य है उसी से टिका ये संसार है,,
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