Wednesday, April 29, 2020

छत्तीसगढ़ से यूरेका योगी की रचना- गरीब

नाम - यूरेका योगी
पता - टेंगना बरपारा, बालोद, छत्तीसगढ़
शीर्षक - गरीब इंसान

      गरीब इंसान
*****************
गरीबी के दलदल में धंसा,
इस दुनिया के रंगमंच पर,
दाने - दाने के लिए तड़पता,
कभी इधर तो कभी उधर,
दर - दर की ठोकरे खाकर,
आंखों में आंसू लिए,
बीवी बच्चों को संग लिए,
काम की तलाश में,
भटकता है गरीब इंसान,
जब न मिल पाता कोई काम,
तब थक कर ,
होकर मजबूर ,
अपने बीवी बच्चों के लिए,
भिखारी तक बनने को तैयार हो जाता है,
जब न देता कोई भीख ,
धरि रह जाती पुस्तकों की सीख ,
तब चोरी कर चोर बन जाता है,
तो कभी किसी का,
जेब काट जेबकतरा कहलाता हैं ,
गरीबी के जंजीर में जकड़ा हुआ,
दो वक्त की रोटी के लिए,
क्या - क्या ? नहीं करता एक गरीब इंसान ।
इस जहांन में भटकते हुए,
किस्मत को कोसते‌ हुए,
इतनी बड़ी दुनिया में,
न कोई सहारा,न कोई शुभचिन्तक,
फिर भी किसी रहम दिल की तलाश में,
घुमता है गरीब इंसान,
लोगों के ‌फेंके हुए कुड़े में,
ढुंढ़ता है कुछ खाने को,
कि शायद मिल जाये,
दो सूखी रोटियां,
जब ये भी न मिल पाये,
तब थक कर,
मजबूर होकर,
भूखे पेट मरने को तैयार हो जाते है, 
गरीबी के जंजीर में जकड़ा हुआ,
पेट भरने के लिए,
क्या -  क्या? नहीं करता एक गरीब इंसान।

    - यूरेका योगी -
टेंगना बरपारा ,‌बालोद , छत्तीसगढ़

1 comment:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...