पता- पिपरभावना, बलौदाबाजार, (छ.ग.)
शीर्षक -- वंदना (दोहा छंद)
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, *दोहा छंद*
, *शब्द -- वंदना*
नित्य करूँ मैं वंदना,
गुरुवर को कर जोर।
पाउँ चरणों में जगह ,
होकर भाव विभोर।।
मात-पिता भगवान हैं,
करना वंदन रोज।
इन देवों को छोड़कर,
करते हो क्या खोज।।
जिनके आशीर्वाद से ,
हुआ सफल हर काम।
करता हूँ नित वंदना,
मात-पिता के नाम।।
धरती माँ की वंदना,
यह ही जग में सार।
सबको समान जानकर,
करती हैं उपकार।।
प्रेम भाव से वंदना,
जन जन को है आज ।
रहे सफलतम कर्म सब,
बन जाए सब काज।।
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रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”
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